04 May 2010

हिंदुस्तान में श्रम विभाग का छापा, बड़े बड़े "भाई लोग" बन गये आपा

आज का दिन रायपुर के पत्रकारों के लिए एक सुखद दिन रहा। प्रेस क्लब के नाम पर अकड़ने और मुख्यमंत्री के ख़ास बनने वालों को आज बड़ा सदमा लगा होगा। पत्रकारों को रेजा - कुली की दर पर काम कराने वालों की आज सुध ली श्रम विभाग ने । श्रम विभाग के तीन इंस्पेक्टर्स ने आज हिन्दुस्तान न्यूज़ के दफ्तर में सबका बयान दर्ज किया। कई खामियां आज खुलकर सामने आ गयी। यहाँ के किसी भी स्टाफ को नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। तनख्वाह की कोई तय तारीख नहीं थी। ये भी जानकारी मिली कि "हिन्दुस्तान न्यूज़ "नाम का कोई पंजीयन नहीं है और तो और डॉल्फिन न्यूज़ विज़न प्राइवेट लिमिटेड का पंजीयन भी श्रम विभाग में दर्ज नहीं है। दो घंटे तक चली इस कारवाई में वहां का मैनेजमेंट ना तो लाइट का बिल ढूंढ पाया ना टेलीफोन बिल। किसी भी चीज़ का कोई रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाया मैनेजमेंट । हिन्दुस्तान न्यूज़ के मालिक को कल मुंबई भेज दिया गया, बताया गया कि अस्वस्थता के कारण उन्हें मुंबई जाना पड़ा। मोहसिन अली का भतीजा वहां administrator के पद पर कार्यरत है। वह भी कल अफ्रीका चला गया। श्रम विभाग के इंस्पेक्टर्स इस बात को लेकर परेशान रहे कि इतने बड़े चैनल ( इंस्पेक्टर्स की नज़र में ) के बारे में कोई भी बात करने को अधिकृत नहीं है। श्रम विभाग का दावा है कि आज की पूरी प्रक्रिया को नस्तीबद्ध करके वो सभी पत्रकारों को पी ऍफ़ कि राशि उपलब्ध करवाने के लिए फाइल आगे बढ़ाएंगे। ये तो हुई आज की बात , अब मैं आप लोगों के सामने एक exclusive न्यूज़ का खुलासा करने जा रहा हूँ।
"हिन्दुस्तान न्यूज़ में है विदेशी फ्यूज़ "
चौंकिए मत॥ आने वाले समय में आपको यकीन करना पड़ेगा की हिंदुस्तान में विदेशी धन का भी इस्तेमाल हो रहा हैं। आज जो बातें सामने आयीं हैं उससे तो लगता है की हिन्दुस्तान न्यूज़ के मालिक राजेश शर्मा को इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रेस क्लब के कथित अध्यक्ष अनिल पुसदकर और मुख्यमंत्री के ख़ास रहने वाले हाजी मोहसीन अली के रहते हुए नवेद को administrator कैसे बना दिया गया। कितना अनुभव है उसको। जुमा जुमा चार दिन तो हुए हैं उसको। वो भी फोड़ा है वॉच न्यूज़ का। कोई लम्बी चौड़ी साज़िश की बू आ रही है मुझे। अनिल पुसदकर और हाजी मोहसीन अली सुहैल का रजिस्टर में नाम भी नहीं है, फिर किस बात का उन्हें भुगतान मिल रहा है। सब काम दो नंबर में चल रहा था वहां। अब धीरे धीरे परतें खुलेंगी। मुझे लगने लगा है की कोई बड़ा भंडाफोड़ होगा और सब जायेंगे तेल लेने।
हिन्दुस्तान न्यूज़ के पत्रकारों ने जो पत्र मंत्रियों और अधिकारीयों को सौंपा है उसे मैं जस का तस आपके सामने रख रहा हूँ ।
महोदय,
हम अधोहस्ताक्षारित लोग डोल्फिन न्यूज़ प्राइवेट लिमिटेड रायपुर हिन्दुस्तान टी वी न्यूज़ चैनल में कार्यरत हैं। पिछले दो तीन दिन से इस चैनल के स्वामी राजेश शर्मा और उनके सलाहकार मोहसिन अली सुहैल हम लोगों को रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने व् परिसर में प्रवेश से रोक रहे हैं। यह न्यूज़ चैनल एच टी वी के नाम से पंजीकृत बताया जाता है क्योंकि हिन्दुस्तान नाम से पंजीयन पत्र वापस हो गया है। यह उल्लेखनीय है की उस न्यूज़ चैनल के मालिक राजेश शर्मा ही नेशनल लुक अखबार व् डोल्फिन international स्कूल के स्वामी हैं। डोल्फिन स्कूल की वर्तमान में कुल ३२ शाखाएं हैं। रायपुर में ८, भाटापारा, राजिम तिल्दा नेवरा और दुर्ग जिले में बेमेतरा , बालोद, देवकर पंडरिया, कवर्धा, चारामा, कांकेर सरिया, सरायपाली, पिथौरा मुंगेली, रायगढ़ , महासमुंद, नगरी में भी इसकी शाखा है। पाटन कोंडागांव और बागबहरा में भी स्कूल खुलने वाली है।
पहली से बारहवीं तक की पढाई के लिए छात्र छात्रों के पालकों से एक मुश्त ८० हज़ार रुपये यह कह कर लिया जाता है की बीच में पैसे नहीं लगेंगे। सी बी एस ई की मान्यता एक वर्ष के लिए नाम मात्र की शालाओं को है, साथ ही राज्य शाशन की मान्यत भी किसी स्कूल को नहीं है। और राजेश शर्मा इसकी आड़ में ५३ करोड़ की फीस एकत्र कर लिए हैं। किसी भी स्कूल को एक साल की मान्यता है, फिर राजेश शर्मा किस तरह पालकों से १२ साल की फीस जमा करा रहे हैं। ५३ करोड़ में से आज राजेश शर्मा के पास ५३ लाख भी किसी बैंक में जमा नहीं करा पाए हैं। तो फिर छात्रों को बारहवीं तक उत्तीर्ण कराने का ज़िम्मा किसके पास होगा, उमा शर्मा डोल्फिन स्कूल की एम् डी हैं। उनके जारी बमक चेक प्रखर टी वी और कई मामले में बाउंस हुए हैं। आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग और आयकर विभाग को डोल्फिन स्कूल में जमा फीस का निरीक्षण कर सत्यता का पता लगाना चाहिए।
यह उल्लेखनीय है की स्कूल फीस से जमा राशि को राजेश शर्मा ने टी वी न्यूज़ चैनल खरीदने के अलावा नॅशनल लुक के लिए मशीन खरीदने में लगा दिया है। इनकी दो सौ से ज्यादा बसें चलती हैं। दो सौ से ज्यादा सुरक्षा गार्ड भी हैं। जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजेश शर्मा ने पहले न्यूज़ टाइम ,टी वी २४ खरीदा फिर आज़ाद न्यूज़ खरीदा फिर चर्दिकला में टाइम टी वी खरीदा फिर हिन्दुस्तान टी वी के लिए आवेदन लगाया जो निरस्त हो गया। अब स्थिति यह है की एच टी वी का सिर्फ लोगो ही पंजीकृत है , ऐसा बताया जाता है।
नेशनल लुक के लिए १८ लाख रुपये इंटीरियर पर ही खर्च हुए फिर ७० हज़ार रुपये प्रति पत्रकार देकर १४ लोगों को एक एक वर्ष के लिए ६ से ७ लाख रुपये अग्रिम में दिए गये हैं। राजेश शर्मा के सलाहकार मोहसिन अली सुहैल का दावा है की उन्होंने बाज़ार से ६० लाख रुपये राजेश शर्मा को दिलाये हैं। नेशनल लुक की मशीन ही तीन करोड़ की है, अखबार का दफ्तर और एच टी वी न्यूज़ चैनल का किराया ही लाखों में है। सभी स्कूल किराए के मकानों में चल रहे हैं.छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूली शिक्षा विभाग की मान्यत भी राजेश शर्मा के डोल्फिन स्कूल को नहीं है, तब किस तरह से वे धड़ल्ले से ८०-८० हज़ार रुपये एकत्र कर रहे हैं? आखिर स्कूल के पैसे कहाँ निवेश हुए या कहाँ जमा है, यह राजेश शर्मा को सरकार और आम लोगों के बीच स्पष्ट करना होगा, प्रशाशन को खुश करने के लिए प्रेस की मशीन का उदघाटन मुख्यमंत्री से कराया और कवर्धा की स्कूल में उनकी माता जी की मूर्ति लगाकर उन्हें खुश करने की कोशिश की गयी। एच टी वी पूरी तरह से साम्प्रदायिक रंग में रंग है। पाकिस्तान के ज़रिये दाऊद का पैसा डोल्फिन, नॅशनल लुक और एच टी वी में लगा है। छत्तीसगढ़ अल्प संख्यक आयोग के अध्यक्ष , उनके बेटे और भाई की भूमिका संदिग्ध है। मोहसिन अली हर साल दुबई जाते हैं। उनकी पत्नी पाकिस्तान की हैं। मुसल्म देशों से मोहसीन अली के ज़रिये राजेश शर्मा को पैसे मिलने की भी खबर है। ये तो हुआ उनका ज्ञापन । श्रम विभाग के इन्स्पेक्टार्स के जाने के बाद वहां प्रबंधन की एक बैठक भी हुई। सब बड़े बड़े भाई लोग इसमें शामिल हुए, नॅशनल लुक के सम्पादक प्रशांत शर्मा, प्रेस क्लब के कथित अध्यक्ष अनिल पुसदकर, सलाहकार मोहसिन अली सुहैल , कुछ स्कूल और अखबार प्रबंधन के लोग भी आये। बताते हैं की बैठक में कहा गया है की छापे से कुछ नहीं होता, सब ठीक हो जायेगा। उनको नहीं पता की कल वहां की बिजली कटने वाली है। घरेलु बिजली से पूरा व्यावसायिक काम हो रहा है।अच्छा है। फ़ोकट का पैसा लेने वालों को अब जाकर काम मिला है। स्वामिभक्ति के लिए दौडभाग तो करनी ही पड़ेगी। अभी तो मुख्यमंत्री और बाकी मंत्रियों से यहाँ के कर्मचारी मिले ही नहीं हैं।

20 comments:

  1. महोदय,
    दो रोज पहले आपकी स्टोरी पढ़ी थी जनाब तभी लग रहा था कि कोई बुलंद हौसले का मालिक जर्नलिस्ट मामले को तह तक पहुंचाकर दम लेगा। आपने जर्नलिस्टों के हित में उम्दा काम किया है।

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  2. वैसे यह सोचने वाली बात है कि जर्नलिस्टों के खैरख्वाह बनने वाले ही जुल्म करने वालों के नजदीक है। अल्लाह खैर करें।

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  3. आप लगे रहिए.. हमने आपकी पोस्ट की फोटो कापी निकाल ली है और उसे दिल्ली भिजवाने का पक्का प्रबंध कर लिया है। आपको इत्तला की जाएगी।
    हमारे मेम्बरान आपसे जल्द मुलाकात भी करेंगे।

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  4. गरीबों का लहु चूसने वाले ये लोग्।

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  5. भ्रष्ट लोग ... इन्हें सबक सिखाओ

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  6. बढ़िया...जानकारी भरी खोजपूर्ण रिपोर्ट के लिए आभार

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  7. '' अंधेर नगरी चौपट राजा .... ''
    व्यवस्था की विसंगति यही तो है , जो कागज़ पर है
    वह असल में नहीं और जो असल में है वह 'न्यूज' में
    नहीं ... सब खोये खोये -से .... बड़े धमाके का इंतिजार है , पर
    जाने कितने धमाके और उनकी नियति इस धमाके के
    भविष्य को भी बांच रही हो जैसे !
    '' आगे ...... '' के आगे का इंतिजार है !

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  8. सी एम जी के नाम का बजा रखा था ढोल
    प्रेस क्लब के काम की खुली आज है पोल
    सबकी होगी जान्च खुलेगा कच्चा चिट्ठा
    तभी चलेगा पता रहा है किसका कितना रोल
    तब काग भुषन्ड जी ने कहा कि कलयुग मे भी अन्याय और अविचार का फल बुरा ही होता है. बस ये अन्तर है कि किसी का मुख काला जल्दी किसे का देरी से होता है

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  9. दोषियों पर सख्त कार्यवाही की जरूरत है / अगर सख्त कार्यवाही नहीं होगी तो इस कसरत का कोई लाभ नहीं होगा /

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  10. मालिकों द्वारा मीड़िया कर्मियों के शोषण जैसा
    कुकृत्य किया जा रहा है,इनको सजा मिलनी चाहिए

    आपने सही समय पर सही भंडाफ़ोड़ कर
    जर्नलिस्टों के हित में उम्दा काम किया है।

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  11. "हिन्दुस्तान न्यूज़ "नाम का कोई पंजीयन नहीं है

    बिना पंजीयन के किसकी सांठ गांठ से चल रहा था?

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  12. यहाँ के किसी भी स्टाफ को नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है।

    तब प्रेस क्लब क्या कर रहा था? क्यों नियुक्ति पत्र नहीं दिलवाया गया?

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  13. "हिन्दुस्तान न्यूज़ में है विदेशी फ्यूज़ "

    हवाला घोटाला है तो इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए
    कि कहीं "फ़ेरा" का उलंघन तो नही हुआ है।

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  14. अनिल पुसदकर और हाजी मोहसीन अली सुहैल का रजिस्टर में नाम भी नहीं है

    रजिस्टर में नाम नौकरों का दर्ज होता है मालिकों का नही।
    कब तुम्हे समझ में आएगा?

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  15. सब जायेंगे तेल लेने।

    क्यों इनके घर में तेल नही हैं क्या? आज तक बिना तेल के ही थे?

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  16. shandar, aapki pahal rang laai, badhai.....
    dekhte hain, aur aage kya kya hota hai.....kahne wale kah rahe hain ki ye to bas dikhave ke liye chhapaa tha shram vibhaag ka...

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  17. जनाब जब भी कोई हजरत अपने भेजे से यह इशारा करें कि देखते आगे क्या होता है तो समझिए वह शख्स किसी न किसी को बचाना चाहता है। पर कोई इन्हें समझाए.. आज बचा लोगे कल परवरदीगार से कौन बताएगा। यदि छापेमारी भी दिखावे की होती है तो फिर असली भी होती होगी। हम अपने मेम्बरान को जल्द ही भेज रहे हैं वे लेबर महकमे से मिलेंगे और महकमे के वजीरेआला से भी। इंशा अल्लाह आपको परेशां होने की जरूरत नहीं।

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